भारत का इतिहास ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ अथवा ‘हड़प्पा सभ्यता’ से आरम्भ होता है।
इस सभ्यता के स्थलों की खोज शुरुआत में सिंधु घाटी क्षेत्र में हुई। जॉन मार्शल ने सर्वप्रथम इसे ‘सिन्धु सभ्यता’ का नाम दिया।
सन् 1921 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक सर जॉन मार्शल के निर्देशन में राय बहादुर दयाराम साहनी ने पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) के मोंटगोमरी जिले में रावी नदी के तट पर स्थित हड़प्पा का अन्वेषण किया।
सर्वप्रथम हड़प्पा में खोज होने के कारण इसे ‘हड़प्पा सभ्यता’ भी कहते हैं।
सिंधु सभ्यता मेसोपोटामिया (दजला-फरात नदी घाटी) और मिस्र (नील घाटी) सभ्यताओं की समकालीन सभ्यता है।
लगभग 12,50,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली सिन्धु सभ्यता समकालीन सभ्यताओं से 12 गुना अधिक विस्तृत है।
इसका क्षेत्र त्रिभुजाकार है।
सिन्धु सभ्यता का विस्तार –
- उत्तर में मूण्डीगाक (अफगानिस्तान) या माण्डा (जम्मू-कश्मीर)
- दक्षिण में दैमाबाद
- पश्चिम में सुतकागेंडोर (बलुचिस्तान)
- पूर्व में आलमगीरपुर (मेरठ)
इस सभ्यता के विस्तार के आधार पर ही स्टुअर्ट पिगट ने हड़प्पा एवं मोहनजोदडों को एक ‘विस्तृत साम्राज्य की जुड़वाँ राजधानियाँ’ बताया है।
