• संविधान सभा का गठन केबिनेट मिशन योजना (1946) के अनुसार किया गया। योजनानुसार संविधान सभा की सदस्य संख्या 389 थी, जिसमें –
    • 292 प्रांतीय विधानसभाओं से चुने सदस्य,
    • 93 रियासतों के प्रतिनिधि, तथा
    • 4 चीफ कमिशनर प्रांतों के सदस्य थे।
  • माउण्टबेटन योजना द्वारा भारत के विभाजन के परिणामस्वरूप 3 जून 1947 को पाकिस्तान के लिए पृथक् संविधान-सभा गठित की गई।
  • इस प्रकार भारतीय संविधान सभा की सदस्य संख्या घटकर 299 रह गई।
  • हैदराबाद एकमात्र रियासत थी जिसका प्रतिनिधि संविधान सभा में नहीं था।
  • संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को संविधान हॉल (संसद भवन के सेन्ट्रल हॉल) में हुई।
  • इसमें 207 सदस्यों ने भाग लिया, जिनमें 7 महिला सदस्य शामिल थीं।
  • सचिदानन्द सिन्हा को अस्थाई अध्यक्ष बनाया गया। 11 दिसम्बर 1946 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी सदस्य चुने गए।
  • पं. जवाहर लाल नेहरू ने 13 दिसम्बर 1946 को उद्देश्य प्रस्ताव रखा।
  • उद्देश्य प्रस्ताव में स्वतंत्र सम्प्रभु गणराज्य, जनता में निहित संप्रभुता, लोगों के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय तथ विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना की गारण्टी की बात की गई। इसे संविधान सभा ने 22 जनवरी, 1947 को स्वीकार किया।
  • संविधान सभा द्वारा अनेक महत्वपूर्ण समितियों की नियुक्ति की गई। संविधान सभा की महत्वपूर्ण समितियाँ थीं –
संघ शक्ति समितिइसमें 9 सदस्य थे। इसके अध्यक्ष थे – जवाहर लाल नेहरू।
मूल अधिकार और अल्पसंख्यक समिति इसमे तीन सदस्य थे। डॉ. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी (अध्यक्ष), गोपाल स्वामी आयंगर और विश्वनाथदास।
प्रांतीय संविधान समिति25 सदस्यों की इन समिति के अध्यक्ष थे – सरदार पटेल।
संघ संविधान समिति15 सदस्यों की इस समिति के अध्यक्ष थे – पं. जवाहर लाल नेहरू
प्रारूप समितिसंविधान का प्रारूप सर बी. एन. राव ने तैयार किया। ये संविधान सभा के सलाहकार थे।
  • 14 अगस्त, 1947 मध्यरात्रि को संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत की विधायी सभा (legislative assembly) बन गई।
  • 29 अगस्त, 1947 को संविधान सभा ने डॉ0 भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में प्रारूप समिति गठित की।
  • प्रारूप समिति के अन्य सदस्य थे – के.एम. मुंशी, बी.एल. मित्तर, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, मोहम्मद सादुल्ला, एन. गोपालास्वामी आयंगर एवं डी.पी. खेतान।
  • संविधान निर्माण प्रक्रिया में 2 वर्ष 11 माह 17 दिन का समय लगा। संविधान सभा ने कुल 165 दिनों के 11 सत्रों में यह संविधान निर्माण कार्य किया। इन 165 दिनों में से 114 दिन प्रारूप संविधान पर विचार-विमर्श किया गया।